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जब गुरु नानक कैलाश पर्वत गए

मनुष्य के मन में कभी कभार लालच जैसी भावना आ जाती है। दूसरों के पास क्या है और हमारे पास क्या नहीं, इसमें मन अटक जाता है। इसी बात से सम्बंधित यहाँ अवधूत शिवानंद जी गुरु नानक जी की कैलाश यात्रा का एक किस्सा सुनाते हैं। जानिये गुरु नानक जी हमें इस अवगुण के बारे में क्या सिखा सकते हैं।

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