जीवन में दुःख क्यों आता है ?

पुरानी फिल्मों में हम देखा करते थे के जब कुछ बुरा होता था तो फिल्म के हीरो या हीरोइन भगवान पे गुस्सा होकर भगवान से पूछता था के उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। जब हमारे जीवन में भी दुःख आता है तो हम भी कुछ ऐसा ही करते...

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Shiv Yog Is A Process Of Purification

There are countless words which are written about spirituality. Despite this, the concept is mystifying even for those who are vaguely familiar with it. Speaking of Shiv Yog, simply put, it is a process of purification. As an individual undergoes this process, new insights and knowledge become available to him....

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अपनी भावनाओं का आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करने के लिए उपयोग करें

ज्यादातर जीवन में जैसी घटना घटती है, वैसिही हमारी भावनाएं हो जाती हैं। अगर कुछ अच्छा हो तो मन में सकारात्मक भावनाएं आती हैं, और बुरा हो तो नकारात्मक भावनाएं। घटनाओं की प्रतिक्रिया होने के बजाए भावनाओं का हम आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करने के लिए उपयोग कर सकते हैं। कैसे?...

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अपनी भावनाओं से इस प्रकार आप अपना जीवन क्रिएट करते हैं

अच्छी सोच, अच्छी भावनाओं से जीवन अच्छा बनता है। बुरी सोच और नकारात्मक भावनाओं से जीवन में दुःख देने वाली घटनाएं क्रिएट होती हैं। ये सीधी सी बात मान लेना आसान है। लेकिन जब आपके मन में बुरे भाव आते हैं या आपके चेहरे पर हमेशा दुःख की भावना ही...

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मुस्कुराने का मनुष्य के स्थूल शरीर पर कैसा असर पड़ता है?

आध्यात्मिक स्तर पर तो समझ आता है के मुस्कुराने से कैसे जीवन में अच्छे और सुखद अनुभव क्रिएट हो सकते हैं – मुस्कुराने से सकारात्मक ऊर्जा क्रिएट होती है और इस ऊर्जा से जीवन में वैसेही सकारात्मक अनुभव क्रिएट होते हैं। लेकिन मुस्कुराने का या न मुस्कुराने का हमारे स्थूल...

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इस एक छोटी सी बात को करने से हम एक खुशहाल जीवन क्रिएट कर सकते हैं

शिव योग में अक्सर कहा जाता है के, मैं ही अपने भाग्य का विधाता हूँ। अच्छे और बुरे कर्मों की तो समझ है हमें – के पुण्य कर्मों से जीवन अच्छा होगा और दुष्कर्मों से नहीं। पुण्य कर्मों के साथ साथ एक आसान-सी बात और है जिसे करने से हम...

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शिव योग एक प्रकार का फिनिशिंग स्कूल है

उच्च वर्ग के परिवारों में बच्चों को स्विट्ज़रलैंड जैसी जगहों पर फिनिशिंग स्कूल में भेजा जाता है। जब युवक की पढ़ाई हो जाती है तो इन फिनिशिंग स्कूल्स में जाकर वे सीखते है के कैसे उठना बैठना चाहिए और व्यक्ति का आचरण कैसा होना चाहिए। इसी प्रकार से कैसे शिव...

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परमात्मा को प्राप्त करने के दशमद्वार हैं। पहला कौन सा है?

अध्यात्म में कहा जाता है के भगवान हमारे भीतर हैं। जो साधनाएं, जो तपस्या साधक करता है, इन सबका यही एक उद्देश्य होता है के अपने भीतर जो भगवान हैं उसे जान सकें। यहाँ तक पहुँचने के लिए साधक को दशमद्वार बताए गए हैं। इसमें से सबसे पहला दरवाज़ा कौनसा...

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अपने भीतर अनंत को जागृत करने से स्थूल शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जब मनुष्य साधक बनता है तो वह अनेक साधनाएं और ध्यान सीखता है। इन सब साधनाओं का एक ही लक्ष्य है – अपने भीतर के परमात्मा को, अपने भीतर के अनंत को जागृत करना। जब साधक इस प्रक्रिया को प्रारम्भ करता है तो उसके जीवन में और स्वतः उसमें, अनेक...

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